हर महिला के लिए मां बनना एक बेहद खास एहसास होता है। बच्चे के साथ महिला का भी एक नया जन्म होता है, लेकिन किसी वजह से जब कोई औरत मां नहीं बन पाती है, तो यह किसी कमी की ओर इशारा करता है। शादी के कई सालों बाद भी जब दंपति को गर्भधारण करने में समस्या आती है, तो उन्हें आईवीएफ की सलाह दी जाती हैं।
आईवीएफ को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन और टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहा जाता है। पुरुष में शुक्राणु की कमी, पीसीओडी की वजह से ओव्यूलेशन में समस्या, फैलोपियन ट्यूब में समस्या, एंडोमेट्रियोसिस या दूसरे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के फेल हो जाने पर डॉक्टर आईवीएफ की सलाह देते हैं। कई मामलों में सारी रिपोर्ट्स ठीक होती हैं लेकिन इलाज के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पाता, तो ऐसे में आईवीएफ ही सहारा होता है।

आईवीएफ ट्रीटमेंट से 50-60 % मामलों में दंपति पहली बार में ही गर्भ धारण कर लेते हैं, जबकि कुछ मामलों में दूसरी या तीसरी बार में यह प्रक्रिया सफल होती है। चलिए जाने कि आईवीएफ क्या होता है और कैसे किया जाता है?
सबसे पहले इस प्रक्रिया का प्रयोग इंग्लैंड में 1978 में किया गया था। इस ट्रीटमेंट में महिला के अंडों को पुरुष के शुक्राणु से मिलाया जाता है। जब इसके संयोजन से भ्रूण बन जाता है तब इसे वापस महिला के गर्भ में रख दिया जाता है। वैसे तो यह प्रक्रिया काफी जटिल और महंगी है, लेकिन यह आईवीएफ प्रक्रिया उन लोगों के लिए वरदान है, जो कई सालों के प्रयास के बाद भी मां बाप नहीं कर पा रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि आईवीएफ कैसे किया जाता है:

आईवीएफ कैसे किया जाता है (Step by Step IVF Procedure in Hindi)

  1. कंसल्टेशन और प्लानिंग
  2. अण्डाशय (ovary) में अंडो की वृद्धि के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं
  3. अंडो और शुक्राणु (sperm) को प्राप्त करने की प्रक्रिया
  4. निषेचन (गर्भधारण) और भ्रूण विकास?
  5. भ्रूण स्थानांतरण
  6. लुटिल फ़ेज
  7. गर्भावस्था परीक्षण (Pregnancy Test)
  8. FAQs

1.कंसल्टेशन और प्लानिंग

आईवीएफ ट्रीटमेंट करवाने से पहले आपको इसके बारे में पहले से एक योजना बनानी चाहिए। सबसे पहले रिसर्च करके एक अच्छे नैतिक मानकों और दिशा निर्देशों का पालन करने वाले आईवीएफ केंद्र का चयन करना चाहिए जहां सफलता की उम्मीद ज्यादा हो| फिर अपने डॉक्टर से इस प्रक्रिया को समझें कि यह इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट क्या है? इसमें क्या जरूरी है? इसमें होने वाले नुकसान के बारे में जाने और यह कैसे होता है? इसके बारे में समझें। एक सही समय चुने और योजना बनाएं। ओमिया को Best IVF Centre in Delhi के रूप में चुना गया है| यदि महिला और पुरुष दोनों वर्किंग है तो परिवार से सहायता लें क्योंकि आपको कई बार इलाज के लिए जाना पड़ सकता है। प्रजनन क्षमता की कुंजी स्वस्थ वजन रखना है इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों से एक संतुलित आहार बनाएं जो पुरुष और महिला दोनों की गर्भधारण करने की क्षमता को बढ़ावा देते हैं। एक बार जब आप आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने का निर्णय लेते हैं तो अपने डॉक्टर पर भरोसा करें और सफल होने के लिए टीम की तरह काम करें। इस ट्रीटमेंट के लिए पति-पत्नी दोनों को तनाव मुक्त रहना चाहिए और उन्हें उपचार का पालन करना चाहिए। उपचार के लिए समय एक महत्वपूर्ण सफलता कारक है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता है इसलिए दोनों को अपने काम और परिवार के कामों को समायोजित करना चाहिए। ट्रीटमेंट के लिए पैसे की जरूरत होगी इसलिए अपना एक बजट बनाएं और अपने बोझ को कम करने के लिए आप ईएमआई का विकल्प तैयार करें।

2. अंडाशय में अंडों की वृद्धि के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं

गर्भधारण करने के लिए अंडे की क्वालिटी अच्छी होना बहुत जरूरी है। इससे प्रेगनेंसी बने रहने और भ्रूण के स्वस्थ रहने की संभावना बढ़ जाती है। गर्भधारण करने के लिए कई चीजें मायने रखती हैं और भ्रूण को पालने के लिए महिलाओं के प्रजनन तंत्र का मजबूत होना बहुत जरूरी है। यदि गर्भवती महिला का अंडा स्वस्थ होगा तो उससे भ्रूण का विकास बेहतर होगा। एक अंडाशय में स्वस्थ अंडे महिला के मासिक धर्म चक्र की अनियमितता, भविष्य में प्रजनन क्षमता और गर्भधारण करने की उसकी क्षमता को निर्धारित करते हैं। आईवीएफ की प्रक्रिया में महिलाओं के अंडाशय में ज्यादा से ज्यादा अंडों के विकास के लिए शुरुआती जांच के बाद महिलाओं को 10 से 12 इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि उनके अंडों में वृद्धि हो। इसके बाद मॉनिटरिंग की जाती है। इसके लिए उनका अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट किया जाता है। इन इंजेक्शंस की मदद से आईवीएफ की प्रक्रिया के लिए अंडे तैयार हो जाते हैं। ज्यादा अंडों से आईवीएफ प्रक्रिया के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।

3. अंडों और शुक्राणु को प्राप्त करने की प्रक्रिया

इस प्रक्रिया में महिला और पुरुष से अंडे प्राप्त करने के लिए पहले महिला और पुरुष की जांच की जाती है। फिर इंजेक्शन के 10-12 दिनों के बाद एक विशेष सक्शन क्रियाविधि की मदद से विकसित अंडों को महिला के शरीर से बाहर निकाला जाता है और उन अंडों को फ्रीज किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान महिला को एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे उसे दर्द का अनुभव न हो सके। पुरुष के सीमेन को लैब में साफ किया जाता है। फिर सक्रिय और असक्रिय शुक्राणु को अलग किया जाता है। उसके बाद परिणाम के अनुसार प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।

4.निषेचन (गर्भधारण) और भ्रूण विकास

अंडा और शुक्राणु को प्राप्त करने के बाद फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया की जाती हैं। एक अंडे को फर्टिलाइज़ करने के दो तरीके हैं, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) जहां फर्टिलाइजेशन के लिए अंडे और शुक्राणु को एक पेट्री डिश में रखा जाता है, या इंट्रासाइटोप्लाज़मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) जिसमें एक शुक्राणु को अंडे के साइटोप्लाज्म में इंजेक्ट किया जाता है। अंडे और शुक्राणु के फर्टिलाइजेशन के बाद तैयार हुए भ्रूण को इनक्यूबेटर में रखते हैं, जहां भ्रूण को विकसित होने और बढ़ने के लिए उचित वातावरण मिलता है। फर्टिलाइजेशन के बाद पांचवें दिन भ्रूण ब्लास्टोसिस्ट स्टेज में विकसित हो जाता है और तब तक वह एक एंब्रॉलजिस्ट की निगरानी में रहता है।

5. भ्रूण स्थानांतरण

एक बार जब भ्रूण ब्लास्टोसिस्ट स्टेज में विकसित हो जाता है तो इसे कैथेटर की मदद से गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। भ्रूण के गर्भाशय में ट्रांसफर के बाद वह गर्भाशय की परत पर प्रत्यारोपित (इमप्लांट) हो जाता है। और 2 सप्ताह बाद ब्लड टेस्ट के द्वारा बीटा-एचसीजी (ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन) हार्मोन की जांच की जाती हैं।

6. ल्युटियल फ़ेज

ल्युटियल चरण आपके मासिक धर्म चक्र का एक चरण है। यह ओव्यूलेशन के बाद होता है (जब आपके अंडाशय एक अंडा छोड़ते हैं) और आप की अवधि शुरू होने से पहले। इस समय के दौरान संभावित गर्भावस्था की तैयारी के लिए आपके गर्भाशय की परत सामान्य रूप से मोटी हो जाती है। यदि आपको ल्युटियल चरण दोष है तो वह अस्तर हर महीने ठीक से नहीं बढ़ता है। इससे गर्भवती होना या रहना मुश्किल हो सकता है।

7. गर्भावस्था परीक्षण

आईवीएफ ट्रीटमेंट के बाद गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर 14 दिनों का समय लेता है। गर्भावस्था की जांच के लिए इतना समय उपयुक्त होता है। स्थानांतरण के बाद भ्रूण खुद को गर्भावस्था के अस्तर से जोड़ता है। जुड़ जाने के बाद यहीं भ्रूण का विकास होता है और धीरे-धीरे यह एक गर्भस्थ शिशु के रूप में परिवर्तित हो जाता है। भ्रूण को अस्तर से जुड़ने में 10 दिनों से अधिक समय लगता है। यही कारण है कि आईवीएफ के लगभग 12 से 14 दिनों बाद प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाता है। ब्लड टेस्ट के द्वारा बीटा-एचसीजी (ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन) हार्मोन की जांच की जाती हैं जिससे गर्भावस्था का पता लगाया जाता है।
कुछ दंपतियों को मामूली परेशानियों के कारण गर्भधारण करने में दिक्कत होती है जबकि कुछ को बड़ी दिक्कतों के कारण इस समस्या से जूझना पड़ता है। आईवीएफ प्रक्रिया ऐसे ही दंपतियों के लिए एक वरदान साबित हुई है जो अब तक माता-पिता बनने में असफल रहे हैं।
अब जब हम यह जान चुके हैं कि आईवीएफ क्या होता है और यह कैसे किया जाता है तो हमारा यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि इसके लिए हम कहाँ जाएँ। आईवीएफ के लिए ओम्या फर्टिलिटी एक अच्छा विकल्प है। यह फर्टिलिटी के सर्वश्रेष्ठ क्लिनिकों में से एक है। साथ ही यहां आधुनिक उपकरणों से जांच की जाती हैं। ओम्या फर्टिलिटी ने आईवीएफ के कई सफल ट्रीटमेंट किए हैं। जिनसे कई लोगों को माता-पिता बनने का सुख मिला है। यहां के डॉक्टर सभी तरह के ट्रीटमेंट करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। साथ ही ओम्या फर्टिलिटी में आपकी जानकारी पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है। यदि आप Best Infertility Treatment in Delhi करवाना चाहते है, तो आप ओम्या फर्टिलिटी को चुन सकते हैं।

8. FAQs

प्रश्न: क्या आईवीएफ की प्रक्रिया में दर्द होता है?

उत्तर: हाँ, इस प्रक्रिया के दौरान दर्द हो सकता है। इंजेक्शन और अंडों को निकालने के समय एक महिला दर्द का अनुभव कर सकती है। हालांकि दर्द का स्तर एक महिला से दूसरी महिला के लिए अलग हो सकता है।

प्रश्न: क्या आईवीएफ बेबी सामान्य होते हैं?

उत्तर: हाँ, क्योंकि पूरी प्रक्रिया में बस फर्टिलाइजेशन ही शरीर से बाहर की जाती है, बाकी गर्भधारण की पूरी प्रक्रिया साधारण यानी नेचुरल प्रेगनेंसी की तरह ही होती है। बच्चे का विकास उसी प्रकार होता है जैसे कि एक नॉर्मल प्रेगनेंसी में होता है।

प्रश्न: आईवीएफ और टेस्ट ट्यूब बेबी में क्या अंतर है?

उत्तर: आईवीएफ तकनीक से गर्भधारण करने वाले बच्चों को संदर्भित करने के लिए टेस्ट ट्यूब बेबी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इन दोनों में कोई अंतर नहीं है दोनों की प्रक्रिया समान है।